Home छत्तीसगढ़ चार नए श्रम संहिता से बढ़ेगा कर्मचारी व मजदूरों पर शोषण –...

चार नए श्रम संहिता से बढ़ेगा कर्मचारी व मजदूरों पर शोषण – एचएस मिश्रा

34
0
Spread the love

00 हित में सरकार से तत्काल वापस लेने की मांग

भिलाई । हिंद मजदूर सभा ( एचएमएस ) के वरिष्ठ नेता एचएस मिश्रा ने चार नए श्रम संहिता को कर्मचारी व मजदूरों के लिए अनुचित बताया है। इन चार श्रम संहिता के चलते बढ़ती हुई महंगाई के दौर में कर्मचारी और मजदूरों का जीवन यापन मुश्किल हो जाएगा। वहीं कंपनी मालिक, ठेकेदार और एजेंसियों की मनमानी पर कोई अंकुश नहीं रहने से कर्मचारी और मजदूरों का शोषण होगा। इसलिए सरकार को तत्काल निर्णय लेते हुए इन चार नए श्रम संहिता को वापस लेना चाहिए।
प्रदेश के वरिष्ठतम श्रमिक नेता एचएस मिश्रा ने बताया कि देश में 29 श्रम कानून लागू था। इन कानूनों को श्रमिकों के 1886 में अमरीका के शिकागो में बहुत बड़े संघर्ष और कईं मजदूरों की शहादत के बाद लागू किया गया था। जिसे खत्म कर भारत सरकार ने चार नए श्रम संहिता को लागू करने का निर्णय लिया है। इन नए श्रम संहिता में श्रमिक संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्त संहिता 2020 शामिल है। इन चारों नए श्रम संहिता से कर्मचारी और मजदूरों का शोषण बढ़ेगा।
उन्होंने बताया कि नए श्रम संहिता के प्रावधान में मजदूरों को प्रतिदिन 8 के बजाय 12 घंटे काम करना पड़ेगा। अतिरिक्त काम का कोई ओवर टाइम नहीं मिलेगा। अधिकतम 40 मजदूर वाले कंपनी या ठेकेदार के लिए सरकार को किसी भी तरह की विवरणी देने की जरूरत नहीं होगी। मालिक या ठेकेदार जब चाहे तब बिना सरकार को अवगत कराए कर्मचारियों की छंटनी कर बाहर निकाल देगा। नए श्रम संहिता में यूनियन बनाने के अधिकार को खत्म कर दिए जाने से मजदूरों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल पाएगा। अपने हक के लिए मजदूर किसी तरह की लड़ाई नहीं लड़ सकेंगे।
‌ श्री मिश्रा ने कहा कि नए श्रम संहिता के माध्यम से सरकार ने कार्पोरेट वर्ग को फायदा पहुंचाने का काम किया है। पहले तालाबंदी और कर्मचारियों की छंटनी के लिए कंपनी को सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी, लेकिन नए श्रम संहिता में इस नियम को शिथिल कर दिए जाने से कंपनी मालिक और ठेकेदार की मनमानी पर कोई अंकुश नहीं रहेगा। आउटसोर्सिंग और ठेके में काम करने वाले मजदूरों का समूह नियमित कर्मचारियों के साथ समर्पित भाव से उत्पादन और लाभ दिलाने में योगदान देता है। इन नए श्रम संहिता से प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर दोनों के कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
श्री मिश्रा ने इसी कड़ी में भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत मजदूरों के साथ हो रही ज्यादातियों की ओर भी प्रबंधन का ध्यानाकर्षण कराया है। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र देश की नवरत्न कंपनियों में से एक है। हाल के दिनों में सभी यूनियन के नेता और पदाधिकारियों ने कर्मचारियों के शोषण के मुद्दे पर प्रबंधन के आईआर उप मुख्य श्रमायुक्त केन्द्रीय के पास शिकायत किया है। भिलाई इस्पात संयंत्र में न्यूनतम वेतन लागू है, उसके बाद भी कंपनी, ठेकेदार और एजेंसियों के द्वारा न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है। बोनस 8.33 प्रतिशत के बजाय दो, तीन या चार हजार रुपए से ऊपर नहीं दिया जा रहा है। कुछ कंपनियां और ठेकेदार तो यह भी नहीं दे रहे हैं। जबकि एडब्ल्यूए 26 दिन काम करने पर प्रतिदिन 128.30 रुपए के हिसाब से 37 सौ रुपए हर महीने देना है। लेकिन कुछ कंपनियां और ठेकेदार 13 सौ से 14 सौ रुपए ही दे रहे हैं। कुछ कंपनियां और ठेकेदार 12 घंटे काम लेकर 8 घंटे का आईआर बनाते हैं, यह आपरेटिंग अथॉरिटी को भी मालूम है। एक तरह से यह अपराध है और इस बात को संज्ञान में लेकर सतर्कता विभाग के अधिकारियों को जांच करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ ठेकेदार और सुपर वाइजर कानून से बचने के लिए मजदूरों के खाते में 12 हजार भेजते हैं और फिर बैंक जाकर 4 हजार रुपए वापस ले लेते हैं। जो मजदूर इसका विरोध करता है, उसका गेट पास छीन लिया जाता है। सिंगल दर ओवर टाइम दिया जा रहा है, जिसका कोई भी रजिस्टर नहीं बनाया जाता है। श्री मिश्रा ने भिलाई इस्पात संयंत्र के नए सीईओ से मजदूरों के साथ हो रहे शोषण को संज्ञान में लेकर त्वरित निराकरण करने की मांग की है।


Spread the love