बिलासपुर.
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने रेप के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा, यदि किसी महिला के साथ पूरा पेनिट्रेशन साबित नहीं होता है, केवल प्राइवेट पार्ट को रगड़ा गया है तो इसे कानून की नजर में दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। इस तरह का कृत्य दुष्कर्म की कोशिश की श्रेणी में आएगा। कोर्ट ने कहा, यदि किसी महिला के साथ पूरा पेनिट्रेशन साबित नहीं होता है, केवल प्राइवेट पार्ट को रगड़ा गया है तो इसे कानून की नजर में दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। इस तरह का कृत्य दुष्कर्म की कोशिश की श्रेणी में आएगा।दुष्कर्म के मामले में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी की सजा को आधी कर दिया है। निचली अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म के आरोप में सात साल की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब आरोपी को साढ़े तीन साल की सजा जेल में काटनी होगी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एनके व्यास ने कहा, आरोपी का गलत होने के साथ ही स्पष्ट भी था। चिकित्सा और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूर्ण पेनिट्रेशन साबित नहीं हो पाया है, लिहाजा यह मामला दुष्कर्म नहीं, दुष्कर्म के प्रयास का मामला है।



