Home छत्तीसगढ़ निराश्रित शिशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी लेना जन सेवा का सबसे अच्छा साधन,

निराश्रित शिशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी लेना जन सेवा का सबसे अच्छा साधन,

by admin

– कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे पहुंचे सेवा भारती के मातृछाया परिसर में, यहाँ रह रहे एक शिशु को एडाप्ट किया गया अभिभावकों द्वारा,
दुर्ग/   कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे आज सेवा भारती संस्था द्वारा बोरसी में चलाये जा रहे मातृछाया परिसर में पहुंचे। यहाँ एक बच्चे को गोद लेने अभिभावक पहुंचे थे। कलेक्टर ने अभिभावक एवं बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन में और आपके जीवन में भी यह बहुत शुभ क्षण है। आप बच्चे का ध्यान रखिये। खूब प्यार से रखिये, बच्चे का भविष्य बनाइये। इसमें ही आपका उज्ज्वल भविष्य भी छिपा है। बच्चे के अभिभावक दंपत्ति ने आभार व्यक्त किया। यहाँ उन्होंने संस्था की गतिविधियों की जानकारी ली। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि वे बिलासपुर में संस्था की गतिविधि देख चुके हैं। शिशु का अभिभावकत्व सबसे अच्छा अनुभव होता है। इनके साथ रहकर, इनकी शरारतों के साथ समय भी बीत जाता है और हमेशा खुशी महसूस होती है। सेवा भारती का यह कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है। हम जानते हैं कि एक शिशु का माता-पिता कितना ध्यान रखते हैं। उसे कितने केयर की जरूरत होती है। ऐसे में कोई शिशु यदि निराश्रित है तो उसकी परेशान कितनी होगी। सेवाभावी संस्थाएं इस संबंध में पहल करती हैं यह बहुत अच्छा है। किसी बच्चे को यदि योग्य अभिभावकत्व मिल जाए। अभिभावकों जैसा प्रेम, दुलार और रखरखाव मिल जाए तो उसके लिए जिंदगी की डगर आसान हो जाती है। हमेशा ऐसे मामलों में बहुत देखरेख की जरूरत होती है। निराश्रित बच्चों की फीडिंग के साथ ही उनकी भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस मौके पर आमंत्रित विशेष अतिथि डाॅ. रश्मि भुरे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को सहेजना बहुत जिम्मेदारी का कार्य है। इसके लिए समय भी समर्पित करना होता है और गहरी संवेदना भी आवश्यक है। जो सेवाभावी संस्थाएं ऐसा कार्य करती हैं उनका कार्य प्रशंसनीय है। छोटे बच्चों की बहुत सी इमोशनल जरूरतें होती हैं। इन्हें पूरा कर और बच्चे का अच्छे से ख्याल रख उसके सुखद भविष्य की नींव तैयार की जा सकती है।
अब पाँच बच्चे रह गए- संस्था निराश्रित बच्चों की देखभाल करती है। पहले संस्था के पास छह बच्चे थे। आज दंपत्ति एक बच्चे को अपने साथ ले गए। अब संस्था में पाँच बच्चे हैं। अधीक्षिका श्रीमती पूनम श्रीवास्तव ने बताया कि शासन की गाइडलाइन के मुताबिक बच्चों का हम लोग पूरा ध्यान रखते हैं। उनके स्वास्थ्य का और भावनात्मक जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखते हैं।

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