Home राजनीति पीएम मोदी के सोमनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष चुने जाने पर अमित शाह खुश, कहा-अब मंदिर की गरिमा और बढ़ेगी

पीएम मोदी के सोमनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष चुने जाने पर अमित शाह खुश, कहा-अब मंदिर की गरिमा और बढ़ेगी

by admin

नई दिल्ली । गुजरात के में गिर-सोमनाथ जिले के प्रभास पाटन में स्थित विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले न्यास ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नया अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुना है, जिसे लेकर देश भर में खुशी का माहौल है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम संदेश लिखते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में यह न्यास मंदिर की गरिमा और भव्यता को और बढ़ाएगा। अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बनने पर हृदयपूर्वक बधाई देता हूं। सोमनाथ तीर्थ क्षेत्र के विकास के प्रति मोदी जी का समर्पण अद्भुत रहा है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि मोदी जी की अध्यक्षता में ट्रस्ट, सोमनाथ मंदिर की गरिमा व भव्यता को और बढ़ाएगा। ट्वीट के साथ गृह मंत्री ने कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं, जिसमें वे पीएम के साथ मंदिर के दर्शन करते दिखाई दे रहे हैं।
ज्ञात हो कि मोदी इस पद पर आसीन होने वाले दूसरे प्रधानमंत्री हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के बाद मोदी दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें इस मंदिर न्यास का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। न्यास के रिकॉर्ड के अनुसार मोदी न्यास के आठवें अध्यक्ष बने हैं। दिल्ली में पीआईबी द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया कि न्यासियों ने सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रस्ट का अगला अध्यक्ष चुना ताकि वह आने वाले समय में मार्गदर्शन कर सकें। विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार कर लिया और सोमनाथ मंदिर न्यास की सराहना भी की। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यास भविष्य में बुनियादी संरचना को उन्नत करने, आवास व्यवस्थाओं में सुधार करने और तीर्थयात्रियों का हमारी महान धरोहर से मजबूत संपर्क स्थापित करने में सक्षम होगा। गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में न्यास के निवर्तमान अध्यक्ष गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल के निधन के बाद सोमनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष का पद रिक्त था। पटेल 16 सालों तक (2004-2020) इस न्यास के अध्यक्ष रहे थे। न्यास के रिकॉर्ड के अनुसार देसाई ने 1967 से 1995 तक न्यास के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवा दी थी।

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