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मोदी की 3 रैलियां और 300 किलोमीटर की दूरी, बंगाल चुनाव में ‘दीदी’ के सांप वाले बयान पर क्या भारी पड़ेगा 7वां वेतन आयोग वाला दांव….

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण 23 अप्रैल से ठीक दो हफ्ते पहले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सुपर थर्सडे’ से बंगाल की ममता सरकार हिल गईं. पीएम मोदी ने बंगाल के तीन अलग-अलग कोनों हल्दिया पूर्व मेदिनीपुर, आसनसोल पश्चिम बर्धमान और सूरी बीरभूम में टीएमसी सरकार पर गरजकर चुनावी बिसात बदल दी है. इन रैलियों में पीएम का अंदाज न केवल बदला हुआ था, बल्कि उन्होंने ममता सरकार के खिलाफ ‘तथ्यों और डेटा’ का ऐसा जाल बुना कि टीएमसी खेमे में हलचल मच गई है. ममता के दो मुंहा सांप वाला बयान के जवाब में पीएम मोदी ने ऐसा लपेटा, जिससे बंगाल की हवा बदल सकती है.
मोदी की बंगाल में कहां-कहां रैलियां?
हल्दिया: यहां पीएम ने सुवेंदु अधिकारी के गढ़ में औद्योगिक विकास और सरकारी नौकरियों में ‘कट मनी’ को मुद्दा बनाया.
आसनसोल: यहां पीएम ने कोयला माफिया और सिंडिकेट राज पर प्रहार किया.
सूरी: बीरभूम के इस केंद्र में पीएम ने कानून-व्यवस्था और संदेशखाली जैसी घटनाओं को लेकर सरकार को घेरा.

पीएम मोदी का ममता सरकार पर क्या-क्या आरोप लगाए?
जीडीपी में गिरावट: पीएम ने आसनसोल में वह आंकड़ा पेश किया जो अब चर्चा का विषय है. मोदी ने कहा- जब देश 100 रुपये कमाता था, बंगाल 11 रुपये देता था, अब केवल 5 रुपये रह गया. उन्होंने सीधे तौर पर ममता सरकार पर बंगाल को आर्थिक रूप से कंगाल करने का आरोप लगाया.

भ्रष्टाचार की ‘6 गारंटी’: हल्दिया में पीएम ने ‘मोदी की 6 गारंटी’ दीं, जिसमें भ्रष्टाचार की पुरानी फाइलें खोलने और 7वें वेतन आयोग को लागू करने का वादा सबसे भारी है.

85 सीटों का गणित और कैसे बदलेगा चुनाव का रुख?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पीएम मोदी की इन तीन रैलियों का प्रभाव सीधे तौर पर 85 विधानसभा सीटों पर पड़ने वाला है. मेदिनीपुर बेल्ट में करीब 35 सीटें हैं. हल्दिया की रैली से पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर की सीटों पर ‘सुवेंदु फैक्टर’ को मोदी की गारंटी का साथ मिला है. यहां भाजपा टीएमसी को क्लीन स्वीप की चुनौती दे रही है.

हिंदी भाषी बेल्ट में करीब 25 सीटें बीजेपी के लिए अहम
औद्योगिक और हिंदी भाषी बेल्ट में करीब 25 सीटें हैं. आसनसोल और बर्धमान की सीटों पर पीएम ने ‘जीडीपी’ और ‘माफिया राज’ की बात कर मध्यम वर्ग और श्रमिकों को साधा है. बीरभूम और राढ़ बंगाल करीब 25 सीटें हैं. सूरी की रैली से बीरभूम और आसपास के जिलों में भाजपा ने उन मतदाताओं को हिम्मत दी है जो टीएमसी के स्थानीय दबदबे यानी सिंडिकेट से त्रस्त हैं.

बीजेपी 2021 में भावनाओं पर जोर दिया था, लेकिन 2026 में मोदी का फोकस ‘जेब’ यानी अर्थव्यवस्था और ‘सुरक्षा’ यानी इंसाफ पर जोर दे रहे हैं. 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण में 152 सीटों पर वोटिंग है और पीएम मोदी की ये रैलियां उन शहरी और अर्ध-शहरी मतदाताओं को भाजपा की ओर मोड़ने की ताकत रखती हैं जो विकास और स्थिरता चाहते हैं. अब देखना यह है कि क्या दीदी के ‘सांप’ वाले बयान पर मोदी का ‘7वां वेतन आयोग’ और ‘जीडीपी का डेटा’ भारी पड़ता है. 4 मई को ही पता चलेगा कि ये 85 सीटें किसकी सत्ता का रास्ता साफ करती हैं.


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