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3 रुपये कीमत बढ़ाने के बाद सरकार ने पेट्रोल पर पहली बार लगाया SAED टैक्‍स, आपको फायदा होगा या नुकसान

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ईरान और अमेरिका के युद्ध ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है. भारत भी इससे अछूता नहीं रहा और धीरे-धीरे इसका असर बढ़ता ही जा रहा है. पहले एलपीजी और हवाई ईंधन पर असर दिखा, फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ गईं. इससे भी काम नहीं चला तो पहली बार सरकार को पेट्रोल पर SAED टैक्‍स लगाना पड़ा. SAED का मतलब है कि स्‍पेशल एडिशनल एक्‍साइज ड्यूटी यानी अतिरिक्‍त विशेष उत्‍पाद शुल्‍क. आखिर इसे लगाने की नौबत क्‍यों पड़ी और इसका आम आदमी को फायदा होगा या नुकसान, ये जानना आपके लिए जरूरी है.
सरकार ने 16 मई से पेट्रोल के साथ-साथ डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर भी इस टैक्‍स को लगाया है. पेट्रोल पर जहां SAED टैक्‍स 3 रुपये लगाया गया है, वह भी पहली बार. वहीं, डीजल पर इसे बढ़ाकर 16.5 रुपये कर दिया गया है, जबकि हवाई ईंधन पर भी SAED टैक्‍स बढ़ाकर 16 रुपये कर दिया गया है. बाकी सभी तो पहले भी SAED टैक्‍स लगता था, लेकिन पेट्रोल पर सरकार ने पहली बार यह टैक्‍स लगाया है.

क्‍यों लगा ना पड़ा है SAED टैक्‍स
यह बात तो आपको पता है कि भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी क्रूड ऑयल आयात करता है, लेकिन यह बात शायद ही आपको पता होगी कि भारत इस कच्‍चे तेल को रिफाइन करके बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल का निर्यात भी करता है. केप्‍लर की ओर से जारी आंकड़ों में देखें तो साल 2025 में भारत ने करीब 4 लाख बैरल पेट्रोल और 6 लाख बैरल उीजल का निर्यात किया था. जनवरी से नवंबर तक भारत को पेट्रोलियम उत्‍पादों के निर्यात से 52 अरब डॉलर की कमाई हुई थी. यह पैसा भारतीय रिफाइनरियों को मिलता है. सरकार ने इस निर्यात को कम करने और पेट्रोलियम उत्‍पाद को देश में ही रोके रखने के लिए यह टैक्‍स लगाया है.


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