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सोने में नहीं, असली पैसा तो यहां बन रहा, 1 साल में ढाई गुना चढ़ गया रेट

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पिछले कुछ समय से अखबारों की सुर्खियां और टीवी की हेउलाइन सोने की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों से भरी रहीं हैं. ज्यादातर आम और खास निवेशकों का फोकस सोने पर ही टिका रहा. लेकिन, पिछले एक साल में असली खेल तो चांदी ने किया है. अगर रिटर्न की बात करें तो बाजी सोने ने नहीं, बल्कि चांदी (Silver) ने मारी है. चांदी ने सालभर में निवेशकों का पैसा लगभग ढाई गुना तक बढ़ा दिया है. सोने की कीमतों में महज 40 फीसदी की बढ़त ही दर्ज की गई है तो चांदी का रेट करीब 140 फीसदी का जोरदार उछाल आया है.
यह कोई शॉर्ट-टर्म या अचानक आया उछाल नहीं है. यदि हम पिछले 5 साल और 10 साल के लॉन्ग-टर्म डेटा का विश्लेषण करें, तो लंबी अवधि के लिहाज से भी चांदी ने सोने के मुकाबले कहीं बेहतर प्रदर्शन (Outperformed) किया है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है क आखिर ऐसा क्‍या हुआ है कि चांदी की चाल अब सोने से तेज हो गई है. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि चांदी की कीमत बढ़ने के पीछे 5 बड़े और ठोस कारण हैं.

किसी भी कमोडिटी की कीमत तय करने में मांग और आपूर्ति (Demand and Supply) का संतुलन सबसे बड़ा फैक्टर होता है. फिलहाल चांदी के मामले में यह संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है. सिल्‍वर इंस्ट्यिूट के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में ग्लोबल सिल्वर प्रोडक्शन में हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है. एक तरफ जहां खदानों से चांदी कम निकल रही है, वहीं दूसरी तरफ उद्योगों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. अनुमानों के मुताबिक, इस साल बाजार में 1,400 टन से भी ज्यादा का ‘सप्लाई डेफिसिट’ (आपूर्ति की कमी) रह सकता है.

सोने और चांदी के बीच सबसे बड़ा बुनियादी फर्क उनकी उपयोगिता में है. सोने का इस्तेमाल ज्यादातर गहने (Jewelry) बनाने या केंद्रीय बैंकों द्वारा सुरक्षित रिजर्व (Safe Haven Asset) के रूप में रखने के लिए किया जाता है. चांदी सिर्फ एक कीमती आभूषण या निवेश की धातु नहीं है, बल्कि यह आज के दौर की एक बेहद अहम ‘इंडस्ट्रियल मेटल’ बन चुकी है. चांदी का इस्‍तेमाल सोलर पैनल्स, ईवी की बैटरियों और इंटरनल सर्किट्स, सेमीकंडक्टर, माइक्रोचिप्स, 5G नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाले हार्डवेयर बनाने में हो रहा है.
गोल्ड-सिल्वर रेशियो का खेल
कमोडिटी मार्केट के बड़े खिलाड़ी हमेशा ‘गोल्ड-सिल्वर रेशियो’ (Gold-Silver Ratio) पर नजर रखते हैं. यह रेशियो यह बताता है कि सोने की कीमत के मुकाबले चांदी कितनी महंगी या सस्ती है. मई 2025 में यह रेशियो ऐतिहासिक रूप से 102 के स्तर पर पहुंच गया था. इसका मतलब यह था कि सोना चांदी के मुकाबले बेहद महंगा था, या यूं कहें कि चांदी अपनी वास्तविक वैल्यू से बहुत ज्यादा सस्ती मिल रही थी.
स्मार्ट निवेशकों और बड़े फंड हाउसेज ने इस मौके को तुरंत भांप लिया. उन्हें समझ आ गया कि चांदी में निवेश करने पर जोखिम कम और बंपर मुनाफे की गुंजाइश सबसे ज्यादा है. इसके बाद बाजार में चांदी की चौतरफा खरीदारी शुरू हुई, जिससे इसकी कीमतों में विस्फोट हो गया. आज यह रेशियो घटकर करीब 58 पर आ चुका है, जो यह दिखाता है कि चांदी ने कितनी तेजी से सोने के साथ अपनी दूरी को कम किया है.


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