देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी भी तरह की कोई किल्लत नहीं है. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि रीटेल पंपों पर भीड़ बढ़ने की असली वजह औद्योगिक और कमर्शियल (बल्क) खरीदार हैं. मई के महीने में करीब 42 करोड़ लीटर डीजल बल्क पंपों के बजाय रीटेल आउटलेट्स पर शिफ्ट हो गया, जिससे कुछ जगहों पर दबाव बढ़ा. आम उपभोक्ताओं को परेशानी से बचाने के लिए सरकार ने 11 जून से रीटेल में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल की सीमा तय की है. यह व्यवस्था अगले 90 दिनों के लिए अस्थायी रूप से लागू की गई है और रिफाइनरियां इस समय अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं.
देश में ईंधन (फ्यूल) की कमी की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा भरोसा दिया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की कोई किल्लत नहीं है. सरकार ने नागरिकों और उद्योगों से ऊर्जा का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की है. एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं. कच्चे तेल (क्रूड) का स्टॉक भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है. उन्होंने औद्योगिक और कमर्शियल (बल्क) उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे रीटेल पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ाने के बजाय अपने खुद के ‘कंज्यूमर पंपों’ से डीजल खरीदें.



