जियो का यह आईपीओ देश के कॉर्पोरेट जगत की सबसे बड़ी लिस्टिंग साबित हो सकता है. कैपिटल मार्केट के जानकार इस बात को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहे हैं. कंपनी की तरफ से जमा किए गए दस्तावेजों में पहली बार इसके वित्तीय प्रदर्शन और बाजार में इसकी स्थिति की तुलना भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसे लिस्टेड प्रतिद्वंद्वियों से की गई है, जिससे निवेशकों को इस मेगा आईपीओ की ताकत का अंदाजा लगाने का मौका मिला है. हालांकि, बाजार के विश्लेषक इस बात पर भी करीब से नजर रख रहे हैं कि निवेशक जियो को केवल एक टेलीकॉम ऑपरेटर मानकर आंकते हैं या फिर एक बड़ी टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनी के रूप में देखते हैं. जियो का भविष्य का वैल्यूएशन इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कंपनी अपने विशाल यूजर बेस को आने वाले समय में कितनी तेजी से बड़ी कमाई में बदल पाती है.
दस्तावेजों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपना डाइल्यूटेड अर्निंग पर शेयर (EPS) ₹33.59 दर्ज किया है. भारत में टेलीकॉम सेक्टर की एकमात्र मुनाफे वाली लिस्टेड कंपनी भारती एयरटेल का पी/ई मल्टीपल (P/E Multiple) 17 जून की क्लोजिंग प्राइस के आधार पर 42.27 गुना है. अगर एयरटेल के इसी मल्टीपल को जियो की वित्त वर्ष 2026 की कमाई पर लागू किया जाए, तो जियो के एक शेयर की संभावित कीमत करीब ₹1,420 बैठती है. 31 मार्च 2026 तक जियो के पास कुल 8.94 अरब आउटस्टैंडिंग शेयर्स मौजूद हैं. इस लिहाज से ₹1,420 प्रति शेयर की कीमत पर कंपनी का कुल इक्विटी वैल्यूएशन यानी मार्केट कैप लगभग ₹12.7 लाख करोड़ हो जाता है. यह वैल्यूएशन कई स्थापित ब्लू-चिप कंपनियों को पीछे छोड़ने के लिए काफी है.



