अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने हाल ही में मुंबई स्थित अपना एक फ्लैट किराए पर दिया है. इस फ्लैट का मंथली रेंट 5.51 लाख रुपये बताया जा रहा है. इससे पहले भी जब यह फ्लैट रेंट पर था तब साल का भर का किराया 1 करोड़ रुपये से अधिक दिखाया गया था. इस बार साल भर का किराया 70 लाख रुपये के करीब है. ऐसे में एक सवाल लोगों के मन में उठ रहा है कि जब किसी के पास इतना पैसा है ही कि वह सालभर का 1 करोड़ रुपये का रेंट अफोर्ड कर सके तो वे लोग घर खरीद क्यों नहीं लेते हैं. आखिर किराए में इतना पैसा देना समझदारी कैसे हो सकती है.
असल में करोड़पति, बड़े कारोबारी, फिल्म सितारे और हाई नेटवर्थ लोग घर खरीदने का फैसला आम लोगों की तरह नहीं करते. उनके लिए घर सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि एक फाइनेंशियल एसेट भी होता है. अगर उन्हें लगता है कि करोड़ों रुपये किसी एक प्रॉपर्टी में लगाने से बेहतर है कि वही पैसा दूसरे निवेश में लगाया जाए, तो वे बिना हिचकिचाए लाखों रुपये महीने का किराया देना भी स्वीकार कर लेते हैं.
मान लीजिए मुंबई के किसी प्राइम इलाके में एक लग्जरी अपार्टमेंट की कीमत 35 करोड़ रुपये है. अगर कोई व्यक्ति यह घर खरीदता है तो उसकी पूरी पूंजी का बड़ा हिस्सा एक ही एसेट में फंस जाता है. दूसरी तरफ अगर वही 35 करोड़ रुपये बिजनेस, शेयर बाजार, प्राइवेट इक्विटी, स्टार्टअप या दूसरे निवेश में लगाए जाएं और वहां 12 से 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिले, तो हर साल कई करोड़ रुपये की कमाई हो सकती है. ऐसे में 60 से 70 लाख रुपये सालाना किराया देना उनके लिए कहीं ज्यादा फायदेमंद सौदा बन जाता है.
किराये का गणित भी खरीदारी के पक्ष में नहीं
भारत के बड़े शहरों में लग्जरी घरों की रेंटल यील्ड आमतौर पर 2 से 4 प्रतिशत के बीच रहती है. इसका मतलब है कि 30 करोड़ रुपये के घर का सालाना किराया करीब 60 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है. यानी किराया, घर की कुल कीमत के मुकाबले काफी कम होता है. इसी वजह से कई अमीर लोग खरीदने की बजाय किराये पर रहना ज्यादा फायदे का सौदा मानते हैं.
कैश फ्लो बना रहता है मजबूत
बिजनेस करने वाले लोगों के लिए नकदी सबसे बड़ी ताकत होती है. अगर करोड़ों रुपये किसी घर में लगा दिए जाएं तो जरूरत पड़ने पर उन्हें निकालना आसान नहीं होता. लेकिन वही पैसा अगर निवेश में लगा रहे तो नए कारोबार, नए निवेश या किसी मौके पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए कई अमीर लोग अपनी पूंजी को चलन में रखना पसंद करते हैं.
जरूरत के हिसाब से बदल सकते हैं घर
बड़े कारोबारी, सीईओ और फिल्मी सितारों का काम अक्सर अलग अलग शहरों और इलाकों में होता है. आज मुंबई के बांद्रा में रहना जरूरी है तो कुछ साल बाद जुहू, दिल्ली, दुबई या लंदन में रहना पड़ सकता है. किराये का घर उन्हें यह आजादी देता है कि बिना करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी बेचने की चिंता किए वे आसानी से नई जगह शिफ्ट हो सकें. समुद्र के सामने अपार्टमेंट, प्रीमियम टावर, प्राइवेट क्लब, स्विमिंग पूल, जिम, हाई सिक्योरिटी और दूसरी लग्जरी सुविधाओं वाले घर खरीदने के लिए कई बार 50 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं. लेकिन वही सुविधाएं किराये पर कहीं कम लागत में मिल जाती हैं. इसलिए कई लोग मालिक बनने की बजाय उपयोग करने को ज्यादा महत्व देते हैं.



