शैक्षणिक भ्रमण से मिली आजीविका को नई उड़ान
रायपुर, 27 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। धमतरी जिले में बैंक ऑफ बड़ौदा आरसेटी (BOB RSETI) के तत्वावधान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही ‘पशु सखियों’ के लिए आयोजित शैक्षणिक भ्रमण महज एक अध्ययन यात्रा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैज्ञानिक आधार देने की एक ठोस पहल साबित हुआ है। इस व्यवहारिक प्रशिक्षण ने गाँव की महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाकर उन्हें तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया है।
दुग्ध शीतलीकरण से लेकर विपणन की बारीकियों का सीधा अनुभव
शैक्षणिक भ्रमण के प्रथम चरण में पशु सखियों ने मुजगहन स्थित दुग्ध शीत केन्द्र का अवलोकन किया। यहाँ महिलाओं को दूध संग्रहण से लेकर गुणवत्ता परीक्षण (Fat एवं SNF जाँच) और मिल्किंग चिलिंग (Milk Chilling) की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया प्रत्यक्ष रूप से समझाई गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि दूध को सही और निर्धारित तापमान पर संरक्षित रखने से उसकी गुणवत्ता बनी रहती है। गुणवत्ता बेहतर होने से सीधे तौर पर पशुपालक किसानों को दूध का उचित एवं बेहतर मूल्य मिलता है।
इस अनुभव से पशु सखियों को दुग्ध उत्पादन से विपणन (Marketing) तक की पूरी मूल्य श्रृंखला (Value Chain) की गहरी समझ हासिल हुई।
नस्ल सुधार और गौठानों में तकनीकी क्रांति
भ्रमण के अगले पड़ाव में पशु सखियों ने ग्राम पोटियाडीह एवं बोड़रा (स.) के गौधामों का रुख किया। यहाँ नियमित कृत्रिम गर्भाधान (AI) रूट के माध्यम से किए जा रहे नस्ल सुधार कार्यों का बारीकी से निरीक्षण कराया गया।
गौठानों में चरवाहों और स्थानीय पशुपालकों के सहयोग से महिलाओं को उन्नत नस्लों की पहचान और चयन,कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं के सुचारू संचालन,पशुओं की दुग्ध क्षमता बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों, तथा वैज्ञानिक पशुपालन से होने वाले दीर्घकालिक आर्थिक लाभों की जानकारी दी गई।
प्रत्यक्ष अनुभव ने यह साबित किया कि यदि गाँवों में नियमित तकनीकी सेवाएँ पहुँचाई जाएँ, तो पशुधन की उत्पादकता में अभूतपूर्व सुधार संभव है।
चारा प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य
यात्रा का तीसरा मुख्य पड़ाव गोविंदी देवी गौशाला रहा, जहाँ पशुओं के पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया गया। नेपियर जैसी पोषक चारा फसलों की उपयोगिता और उत्पादन विधि की जानकारी दी गई। यूरिया उपचारित पैरा (पुआल) के माध्यम से सूखे चारे की पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के आसान तरीके सिखाए गए। इस तरह कम लागत में संतुलित पशु आहार तैयार करने की विधि बताया गया।
इसी तरह पशुओं को होने वाली विभिन्न बीमारियों जैसे खुरपका-मुंहपका (FMD), आदि बीमारियों का नियंत्रण, नियमित टीकाकरण, स्वच्छता और वैज्ञानिक रखरखाव के बारे में विस्तार से बताया गया।
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और भविष्य की दिशा
इस शैक्षणिक भ्रमण दल का विशेषज्ञों ने उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पशु सखियाँ केवल प्रशिक्षार्थी नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण छत्तीसगढ़ की पशुपालन व्यवस्था की मुख्य तकनीकी सहयोगी हैं।प्रशिक्षण प्राप्त पशु सखियों का कहना है कि इस फील्ड विजिट ने उनके मन से झिझक को दूर कर दिया है। अब वे अपने-अपने गाँवों में जाकर पशुपालक परिवारों को दुग्ध गुणवत्ता, संतुलित आहार, नस्ल सुधार और पशु स्वास्थ्य के प्रति अधिक आत्मविश्वास के साथ जागरूक करेंगी।
धमतरी जिले का यह समन्वित प्रयास न केवल महिला स्वावलंबन की मिसाल पेश कर रहा है, बल्कि यह आने वाले समय में प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।



