Kinnar Samaj किन्नर समाज में अभूतपूर्व योग्यता और प्रतिभा है। वे अपनी प्रतिभा को पहचाने और आगे बढ़े। किन्नर समाज में अभूतपूर्व ऊर्जा है। यदि यह समाज संगठित हो जाए तो उन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। वे आर्शीवाद देगें छत्तीसगढ़ सहित पूरा देश सुख समृद्धि से परिपूर्ण हो और उन्नति के राह में निरंतर आगे बढ़े।
राज्यपाल ने कहा कि यह मेरे जीवन में पहली बार अवसर आया कि ऐसे कार्यक्रम में शामिल हो रही हूं। मैं अपने आप को धन्य मानती हूं कि मुझे इस कार्यक्रम के माध्यम से किन्नर समाज के पास आने को मिला। उन्होंने कहा कि किन्नर हमारे समाज के वे नागरिक है जिनके मुख से निकले शब्द सर्वदा पुण्यकारी होते हैं। ये ईश्वर की वे संतान हैं जो सर्वजनों के कल्याण की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम ने किन्नरों को मंगलामुखी की संज्ञा दी थी ।
( Kinnar Samaj )किन्नर समाज जागरूक है और सभी के साथ कंधा से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहा है। किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने निर्वाचन में हिस्सा लिया और जीत भी दर्ज की। आज केंद्र सरकार द्वारा उनके कल्याण के लिए कई योजनाए चलाई जा रही है। छत्तीसगढ़ में उनके कल्याण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। यह गर्व कि बात है छत्तीसगढ़ में इस समाज के प्रतिनिधि पुलिस सेवा में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे है। इसके लिए उन्हें शुभकामनाएं देती हूं। सुश्री उइके ने आग्रह किया कि इस समाज के लोग आगे आएं और अपने समाज को शिक्षित करें और शासन की योजनाओं का लाभ लेते हुए आत्मनिर्भर बनें। राज्यपाल ने कार्यक्रम के दौरान प्रतिभावान बच्चों को पुरस्कृत किया।
श्री सोनी ने एप के बारे में बताया कि ( Kinnar Samaj ) किन्नर समाज की वेबसाइट से असली और नकली उनकी पहचान की जा सकेगी। इस वेबसाइट में किसी किन्नर के नाम दर्ज करने पर असली की पहचान की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि किन्नरों के कल्याण के लिए कार्य किए जा रहे है। भविष्य में निःशुल्क कोचिंग की जाएगी, जिसमें आधी सीट किन्नरों के लिए आरक्षित रहेगी। कार्यक्रम को राष्ट्रीय महिला आयोग की सलाहकार मंडल की सदस्य हर्षिता पांडे, उमाशंकर व्यास ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय किन्नर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ज्योति नायक किन्नर, प्रदेश उपाध्यक्ष नगीना नायक किन्नर सहित बड़ी संख्या में किन्नर समाज के सदस्य उपस्थित थे।
FTO का फुल फॉर्म Fund Transfer Order है।जिसका मतलब यह होता हैं कि “राज्य सरकार” द्वारा लाभार्थी के आधार नंबर, बैंक खाता संख्या और बैंक के IFSC कोड सहित अन्य विवरणों की जांच कर ली गई है और सही पाए गए हैं आपकी किस्त राशि तैयार हैं और सरकार द्वारा इसे आपके बैंक खाते में भेजने के आदेश दे दिए गए हैं। लेकिन अभी तक कोई एफटीओ जारी नहीं किया गया है।
जानकारी के मुताबिक पिछले साल 25 दिसंबर को (PM Kishan Samman Nidhi yojna) पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों के खातों में पैसे भेजे थे। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (PM Kishan Samman Nidhi yojna) पीएम किसान सम्माम निधि योजना के तहत 18 हजार करोड़ रुपए जारी किए। पीएम किसान योजना की किस्त के तौर पर देश के करीब नौ करोड़ से अधिक किसानों के खाते में 18 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए।
इसके बाद 31 मार्च 2021 तक इस किस्त के तहत 10,23,49,443 लाभार्थियों के खातों में पैसा पहुंच चुका है।
पीएम किसान सम्मान निधि के तहत केंद्र सरकार हर साल 6000 रुपये 2000-2000 की तीन किस्तों में किसानों के खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर करती है। अब तक सरकार 9 किस्तें जारी कर चुकी है और इस योजना में 12 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड किसानों को इंतजार है।
इस बार पीएम किसान सम्मान निधि योजना में एक बड़ा बदलाव किया गया है। किसानों को e-KYC करना होगा।
अब तक मिल चुकी हैं नौ किस्तें 10 वी क़िस्त बाकी
पहली किस्त DEC-MAR 2018-19 के लाभार्थी किसानों की संख्या 3,16,10,700
दूसरी किस्त APR-JUL 2019-20 के लाभार्थी किसानों की संख्या 6,63,27,601
तीसरी किस्त AUG-NOV 2019-20 के लाभार्थी किसानों की संख्या 8,76,21,282
चौथी किस्त DEC-MAR 2019-20 के लाभार्थी किसानों की संख्या 8,96,00,395
पांचवी किस्त APR-JUL 2020-21 के लाभार्थी किसानों की संख्या 10,49,31,270
छठवीं किस्त AUG-NOV 2020-21 के लाभार्थी किसानों की संख्या 10,23,14,245
सातवीं किस्त DEC-MAR 2020-21 के लाभार्थी किसानों की संख्या 10,23,49,456
आठवीं किस्त APR-JUL 2021-22 के लाभार्थी किसानों की संख्या 11,11,52,851
नवमी किस्त AUG-NOV 2021-22 के लाभार्थी किसानों की संख्या 11,12,88,002
]]>इस मामले पर सुनवाई करते हुए (Supreme Court) कोर्ट ने आंकड़ों को साझा करने का निर्देश देने की मांग पर आदेश नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इसे लागू करने के लिए जनगणना के आंकड़े मांगे थे।
स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण देने के लिए आंकड़ों को सार्वजनिक करने के लिए कहा गया था। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने ने इस मामले पर सुनवाई की।
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह बात अहम है कि केंद्र के उस हलफनामे को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। जिसमें कहा गया है कि 2022 में भी जातिगत जनगणना नहीं कराई जाएगी।
पीठ ने केंद्र सरकार के रुख पर ध्यान देते हुए रिट (Supreme Court) याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि एसईसीसी-2011 पिछड़े वर्गों के आकंड़ों और एसईसीसी-2011 के दौरान एकत्र किए गए जाति डेटा की गणना करने की कवायद नहीं थी।
डेटा सटीक नहीं था और त्रुटियों से भरा था
केंद्र ने एक हलफनामा दायर कर कहा कि उसने आगामी 2021 की जनगणना में जानकारी के संग्रह के लिए 7 जनवरी 2020 को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी शामिल है। डेटा सटीक नहीं था और त्रुटियों से भरा था।
लेकिन जाति की कोई अन्य श्रेणी नहीं है। इसलिए, केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि आगामी 2021 की जनगणना में ग्रामीण भारत में बीसीसी से संबंधित सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों की गणना को शामिल करने के लिए जनगणना विभाग को कोई निर्देश जारी न करें। ऐसे में कोर्ट ने भी सरकार की बात को माना और अभी डेटा जारी करने की याचिका को खारिज कर दिया।
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