रायपुर, 30 दिसंबर । Pandit Ravi Shankar Shukla punyatithi मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल की 31 दिसम्बर को पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पंडित रविशंकर शुक्ल जी ने कई राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय और शीर्ष भूमिका निभाई।
(Pandit Ravi Shankar Shukla punyatithi) छत्तीसगढ़ में उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरूद्ध लोगों को जागरूक कर गांधी जी के विभिन्न आंदोलनों में सहयोग के लिए प्रेरित किया। श्री बघेल ने कहा कि पंडित रविशंकर शुक्ल जी लोकप्रिय जन नेता और कुशल प्रशासक थे।
उन्होंनेे मुख्यमंत्री रहते हुए छत्तीसगढ़ अंचल में शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई सहित विभिन्न क्षेत्रों की विकास योजनाओं में महती भूमिका निभाई।
]]>उनका जन्म 21 दिसम्बर 1891 को राजनांदगांव जिले के दैहान ग्राम में हुआ। पिता का नाम दीनदयाल सिंह तथा माता का नाम नर्मदा देवी था। आपकी शिक्षा राजनांदगांव तथा रायपुर में हुई।
नागपुर तथा जबलपुर में आपने उच्च शिक्षा प्राप्त कर 1916 में वकालत की परीक्षा उत्तीर्ण की। बाल्यकाल से ही आप मेधावी तथा राष्ट्रीय विचारधारा से ओत-प्रोत थे।
1906 में बंगाल के क्रांतिकारियों के संपर्क में आकर (Thakur Pyarelal singh) क्रांतिकारी साहित्य के प्रचार आरंभ किया और विद्यार्थियों को संगठित कर जुलूस के समय वन्देमातरम् का नारा लगवाते थे। 1909 में सरस्वती पुस्तकालय की स्थापना की।
1920 में राजनांदगांव में (Thakur Pyarelal singh) मिल-मालिकों के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई, जिसमें मजदूरों की जीत हुई। आपने स्थानीय आंदोलनों और राष्ट्रीय आंदोलन के लिए जन-सामान्य को जागृत किया।
1925 से आप रायपुर में निवास करने लगे। आपने छत्तीसगढ़ में शराब की दुकानों में पिकेटिंग, हिन्दू-मुस्लिम एकता, नमक कानून तोड़ना, दलित उत्थान जैसे अनेक कार्यो का संचालन किया। देश सेवा करते हुए आप अनेक बार जेल गए। मनोबल तोड़ने के लिए आपके घर छापा मारकर सारा सामान कुर्क कर दिया गया, परन्तु आप नहीं डिगे।
राजनैतिक झंझावातों के बीच 1937 में रायपुर नगरपालिका के अध्यक्ष चुने गए। 1945 में छत्तीसगढ़ के बुनकरों को संगठित करने के लिए आपके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ बुनकर सहकारी संघ की स्थापना हुई। प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को शोषण एवं अत्याचार से मुक्त कराने की दिशा में भी आप सक्रिय रहे।
वैचारिक मतभेदों के कारण सत्ता पक्ष को छोड़कर आप आचार्य कृपलानी की किसान मजदूर प्रजा पार्टी में शामिल हुए। 1952 में रायपुर से विधानसभा के लिए चुने गए तथा विरोधी दल के नेता बने।
विनोबा भावे के भूदान एवं सर्वोदय आंदोलन को आपने छत्तीसगढ़ में विस्तारित किया। 20 अक्टूबर 1954 को भूदान यात्रा के समय अस्वस्थ हो जाने से आपका निधन हो गया। छत्तीसगढ़ शासन ने उनकी स्मृति में सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘ठाकुर प्यारेलाल सिंह सम्मान’ स्थापित किया है।
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