गोबर विक्रेताओं को आज जारी की गई राशि को मिलाकर अब तक उन्हें 119.41 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह गौठान समितियों को अब तक 42.73 करोड़ रूपए तथा महिला स्व-सहायता समूहों 27.99 करोड़ रूपए राशि लाभांश के रूप में दी जा चुकी है।

( Godhan nyaay yojana )इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, विनोद वर्मा और राजेश तिवारी, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव रेणु जी पिल्ले और सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, गोधन न्याय योजना के नोडल अधिकारी डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर, 1 जनवरी । panjeekrt kisaan प्रदेश में धान खरीदी तेजी से हो रही है, अब तक लगभग 58 प्रतिशत किसानों का धान खरीदा जा चुका है, हम सभी पंजीकृत किसानों से धान खरीदने प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह बात दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक के जामगांव-आर में आयोजित बाबा गुरु घासीदास जयंती समारोह में कही। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि सभी सोसाइटी में किसानों के लिए धान खरीदी के अच्छे प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं और इसके लिए बेहतर व्यवस्था बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल 92 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी हुई थी, इस साल एक करोड़ मीट्रिक टन धान खरीदी की संभावना है। उन्होंने कहा कि देश भर में डीएपी का संकट है और छत्तीसगढ़ में इस संकट से निपटने के लिए वर्मी कंपोस्ट एवं सुपर कंपोस्ट के निर्माण को बढ़ावा देने का बड़ा लाभ हुआ है। मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद किसानों से वर्मी कंपोस्ट से आए उत्पादन के बारे में पूछा। किसानों ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट से अच्छी फसल हुई है, फसल की चमक भी अच्छी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ( panjeekrt kisaan ) छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में गोधन न्याय योजना के माध्यम से मिसाल स्थापित की है। इस बार राजपथ में छत्तीसगढ़ के गोधन न्याय योजना की अनुपम झांकी भी दिखेगी और प्रदेश में हो रहे कृषि से संबंधित नवाचारों की झलक भी देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले गोबर केवल लीपने के काम आता था, अब यह पोतने के काम भी आएगा। गोबर से पेंट बनाने के लिए काम चल रहा है। इसके अलावा गांव में गोबर के माध्यम से बिजली का उत्पादन भी होगा। इसके लिए बाहर के विशेषज्ञ शीघ्र ही आएंगे और इस पर तकनीकी रूप से काम आगे बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि बाबा गुरु घासीदास का संदेश मनखे-मनखे एक समान का था। उनके द्वारा दिया गया समानता का यह भाव छत्तीसगढ़ी समाज में गहराई से पनपा है। सतनाम पंथ का सफेद ध्वज शांति का प्रतीक है। ( panjeekrt kisaan ) मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि नशा सामाजिक बुराई की जड़ है इस वजह से महिलाओं को विशेष रुप से तकलीफों का सामना करना पड़ता है।
चाहे सतनाम समाज हो या अन्य सभी समाज, सभी समाजों से अगर नशा मुक्ति की पहल हो, जन जागरूकता अभियान तेजी से चलाया जाए, तो इस बुराई को कम करने में बड़ी सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जामगांव-आर एवं सेलूद में सभागार भवन के निर्माण की घोषणा भी की। इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
]]>गोधन न्याय योजना (Godhan Nyay Yojna) लगातार जोर- शोर से आगे बढ़ रही है। जिसमे हजारों की संख्या में सदस्य जुड़ रहे है और महिलाएं काम कर रही है। बड़े पैमाने पर गोबर की खरीदी की जा रही है। गांव के लोग इस योजना के आ जाने से बहोत खुश हैं क्योंकि यह योजना उनके आय का माध्यम भी बन गया है। इससे घर में बेरोजगार बैठी महिलाओं को महिला समूहों के सांथ मिलकर काम करने का मौका मिल रहा जिससे महिलाएँ अपना पहचान भी बना रहे हैं।
गौठानों में गोबर से महिला स्व सहायता समूह बड़े पैमाने पर वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट प्लस एवं गोबर से खाद के अलावा गो-कास्ट, दिया,अगरबत्ती, मूर्तियां और अन्य सामग्रियां भी बना रही है। तथा सब्जी एवं मशरूम का उत्पादन, मुर्गी, बकरी, मछली पालन एवं पशुपालन कर, सामग्री का निर्माण एवं विक्रय से लाभ अर्जित कर रहीं हैं। इस योजना में अब तक लगभग 67 हजार सदस्य संख्या और राज्य में गौठानों से 9321 महिला स्व सहायता समूह जुड़ चुके हैं। जिसमे 10569 गांवों में गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है,और 7777 गौठान निर्मित एवं संचालित किये जा चुके हैं।
इस योजना की शुरूआत 20 जुलाई 2020 को हरेली तयोहार से हुई थी। 20 जुलाई से 15 नवंबर 2021 तक 55.77 लाख क्विंटल गोबर (Godhan Nyay Yojna) की खरीदी की जा चुकी है। जिसके एवज में 111 करोड़ 56 लाख रूपए गोबर बेंचने वालों को भुगतान भी किया गया। वंही महिला समूहों को अब तक 48 करोड़ 20 लाख रूपए की आय हो चुकी है।
अब तक महिला समूहों द्वारा 9 लाख 32 हजार क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तथा 4 लाख 12 हजार क्विंटल से अधिक सुपर कम्पोस्ट खाद का निर्माण किया जा चुका है, जिसे सोसायटियों के माध्यम से शासन के विभिन्न विभागों एवं किसानों को रियायती दर पर प्रदान किया जा रहा है।
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