रायपुर. 03, जनवरी । manarega aur ‘bihaan‘ इंद्राणी, उर्मिला, सुनीता और सातोबाई की जिंदगी अब बदल चुकी है। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) और ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) ने उनका जीवन बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। मनरेगा और 14वें वित्त आयोग के अभिसरण से निर्मित वर्क-शेड में स्वसहायता समूह की ये महिलाएं ‘बिहान कैंटीन’ संचालित कर रोज लगभग एक हजार से 1200 रूपए की कमाई कर रही हैं।
ये चारों महिलाएं कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के राजानवागांव के भारत माता स्वसहायता समूह की सदस्य हैं। इन महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित ग्राम संगठन से 30 हजार रूपए का कर्ज लेकर कैंटीन शुरू किया है। इनके हुनर और इनके बनाए नाश्ते के स्वाद से कैंटीन में भीड़ जुटने लगी है। प्रसिद्ध पर्यटन एवं धार्मिक स्थल भोरमदेव पहुंचने वाले पर्यटक, कैंटीन के पास स्थित भोरमदेव आजीविका केन्द्र में काम करने वाले तथा नजदीकी धान खरीदी केन्द्र में आने वाले किसानों की भीड़ वहां लगी रहती है।
इससे इनकी आमदनी बढ़ रही है। अक्टूबर-2021 के आखिरी सप्ताह में शुरू हुई इस कैंटीन से इन महिलाओं ने अब तक लगभग 60 हजार रूपए का नाश्ता बेचा है। इसमें से 30 हजार रूपए बचाकर उन्होंने आमदनी में हिस्सेदारी के साथ ग्राम संगठन से लिया गया कर्ज लौटाना भी शुरू कर दिया है।
(manarega aur ‘bihaan‘ )‘बिहान कैंटीन’ संचालित करने वाली भारत माता स्वसहायता समूह की सचिव श्रीमती उर्मिला ध्रुर्वे बताती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत उनके समूह का गठन हुआ है। समूह ने कैंटीन चलाने के लिए बर्तन और राशन खरीदने ग्राम संगठन से 30 हजार रूपए का ऋण लिया है। समूह की चार महिलाएं इस कैंटीन का संचालन कर रही हैं।
उर्मिला आगे बताती है कि समूह की कोशिश रहती है कि कैंटीन में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को गरमा-गरम चाय-नाश्ता परोसा जाए। दिनभर की मेहनत के बाद चारों सदस्यों को 300-300 रूपए की आमदनी हो जाती है। मनरेगा और ‘बिहान’ के सहयोग से वे अब आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो रही हैं।
राजानवागांव के सरपंच श्री गंगूराम धुर्वे स्व सहायता समूह के लिए मनरेगा अभिसरण से बने इस वर्क-शेड के बारे में बताते हैं कि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर वर्ष 2020-21 में इसकी स्वीकृति मिली थी।
भोरमदेव आजीविका केन्द्र से लगा यह शेड सात लाख आठ हजार रूपए की लागत से जुलाई-2021 में बनकर तैयार हुआ। (manarega aur ‘bihaah‘ ) गांव के मनरेगा श्रमिकों को इसके निर्माण के दौरान 335 मानव दिवस का रोजगार प्राप्त हुआ जिसके लिए उन्हें करीब 64 हजार रूपए का मजदूरी भुगतान किया गया। मनरेगा और 14वें वित्त आयोग के अभिसरण से निर्मित इस परिसम्पत्ति ने कैंटीन के रूप में महिलाओं को आजीविका का नया साधन दिया है।
]]>गौरेला पेंड्रा मरवाही, 3 दिसंबर | महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के आयुक्त मोहम्मद कैसर अब्दुलहक आज जिले के प्रवास पर हैं। वे पेंड्रा और गौरेला जनपद पंचायतों का सघन दौरा कर स्टॉप डेम, आंगनबाड़ी भवन, मुक्तिधाम, प्रतीक्षालय, धान चबूतरा निर्माण, शेड, डबरी निर्माण आदि विकास कार्यों का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे रहे हैं।
उन्होंने जनपद पंचायत पेंड्रा के ग्राम लाटा में स्टॉप डेम निर्माण कार्य, सोनबचरवार में आंगनबाड़ी भवन एवं निजी सिंचाई कूप निर्माण, आमाडाँड़ में मुक्तिधाम सह प्रतीक्षालय, नवागांव में धान उपार्जन केंद्र, चबूतरा निर्माण एवं बाजार शेड निर्माण, पनकोटा में स्टॉप डेम निर्माण और ग्राम पंचायत झाबर में निजी डबरी निर्माण तथा पेंड्रा में धान उपार्जन केंद्र का निरीक्षण कर रहे हैं। उनके द्वारा धान खरीदी केन्द्रों में व्यवस्था तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं और बारदानों के स्टॉक के बारे जानकारी ली गई। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर नम्रता गांधी, पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल, परियोजना निदेशक आर के खूंटे, कार्यपालन अभियंता आर ई एस शरद श्रीवास्तव, जनपद सीईओ भूपेंद्र सोनवानी सहित मनरेगा से सम्बंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित हैं।
दौरा कार्यक्रम के अनुसार मनरेगा आयुक्त अपरान्ह मे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के ग्राम धनौली में गौठान निर्माण, धान उपार्जन केंद्र और मुर्गी पालन, बकरी पालन एवं बत्तख पालन के लिए शेड एवं नर्सरी का अवलोकन करेंगे। वे झगराखांड़ में मुक्तिधाम सह प्रतिक्षालय, सधवानी में तालाब निर्माण, खोडरी में धान उपार्जन केंद्र, चबूतरा निर्माण, जोगीसार में आंगनबाड़ी भवन निर्माण तथा ग्राम पंचायत बेलपत में निजी भूमि सुधार कार्यों का अवलोकन करेंगे।