नववर्ष में श्रमवीरों के साथ सुबह की चाय पी
श्रम अन्न योजना केन्द्र में जाकर श्रमिक भाई-बहनों के साथ की चर्चा, व्यवस्थाओं का लिया जायजा
रायपुर, 1 जनवरी । naye varsh ki shurooaat mukhyamantri मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज सवेरे नववर्ष के प्रथम दिन राजधानी रायपुर के कोतवाली चावड़ी के मेहनतकश मजदूर भाई-बहनों के साथ हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नववर्ष का अभिनंदन किया। उन्होंने श्रमवीर भाई-बहनों को मिठाई खिलाकर और कंबल भेंट कर उनके साथ नए वर्ष की खुशियां बांटी। श्री बघेल ने इस अवसर पर श्रमवीरों सहित सभी लोगों को नए वर्ष की शुभकामनाएं दीं।
( naye varsh ki shurooaat mukhyamantri )मुख्यमंत्री श्री बघेल ने नव वर्ष पर श्रमवीरों को सौगात देते हुए भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत भगिनी प्रसूति सहायता योजना में सहायता राशि 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता कर्मियों की मेहनत से छत्तीसगढ़ को लगातार तीसरी बार देश के सबसे स्वच्छ राज्य का पुरस्कार मिल है। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने स्वच्छता कर्मियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के श्रम के सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा की नये वर्ष में बुजुर्गों और हमारे पुरोधा, हमारे महापुरूषों के सपनों को साकार करना ही हमारे नए वर्ष का संकल्प है।
मुख्यमंत्री ने इसके पहले राजधानी रायपुर के गांधी मैदान में श्रमवीरों को गरमा-गरम भोजन उपलब्ध कराने के लिए संचालित शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना केंद्र में पहुंचकर वहां श्रमिक भाई-बहनों के साथ चर्चा की और सुबह की चाय पी। श्रमिक भाई-बहनों ने मुख्यमंत्री को बताया की पंजीकृत कार्डधारी श्रमिकों को इस केंद्र से 5 रुपए में गरमा-गरम भोजन मिलता है और बिना कार्डधारी श्रमिक भाई बहनों को 10 रुपए में भरपेट भोजन मिलता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भूमिहीन श्रमिकों को जिनके पास एक इंच भी भूमि नहीं है उन्हें सालाना 6 हजार रूपए देने का निर्णय लिया है। यह राशि राज्य सरकार की राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के अंतर्गत बहुत जल्द उन्हें मिलने लगेगी। रायपुर नगर निगम के महापौर श्री एजाज ढेबर और छत्तीसगढ़ भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री सुशील सन्नी अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर कहा कि जब से मैं मुख्यमंत्री बना हूं, चावड़ी में आकर मजदूर भाई-बहनों के साथ नए साल की शुरुआत करता हूं क्योंकि इन्हीं श्रमिकों के दम पर भवन, सड़कें और नालियां बनी हैं, साफ सफाई का कार्य हो रहा है। आज यदि बीमारियों से हम सुरक्षित हैं तो हमारे श्रमिकों, सफाई कर्मियों के कारण यह संभव हो पाया है। हमारे खेतों में काम करने वाले किसान के कारण हमको अन्न मिलता है। (naye varsh ki shurooaat mukhyamantri ) मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रम के सम्मान का यह मार्ग हमको राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी से मिला है, गांधी जी ने नील की खेती करने वाले किसानों की लड़ाई लड़ी। गांधी जी ने बुनकरों की तकली, चरखा को राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक बनाया, उन्होंने खुद मैला ढोने का काम किया। गांधीजी ने दलितों की मोहल्ले में जाकर वहां सफाई का काम किया। उन्होंने यह संदेश दिया है कि कार्य चाहे जो भी हो, कोई भी काम छोटा नहीं होता, उसे पूरी शिद्दत के साथ, पूरे समर्पण के साथ करें तो निश्चित रूप से सफलता मिलती है।
मुख्यमंत्री ने श्रम वीरों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सभी लोगों का सम्मान करके आज मुझे महसूस हो रहा है कि हम गांधी जी के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद किसानों को हमने दाम दिया, आज किसानों को धान का समर्थन मूल्य और राजीव गांधी किसान न्याय योजना की इनपुट सब्सिडी मिलाकर 2500 रुपए क्विंटल धान की कीमत मिल रही है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में लिए गए फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योगों में कार्यरत मजदूर की उम्र 58 साल से बढ़ाकर 60 साल की गई है, इससे लगभग 4 लाख श्रमिकों को अतिरिक्त 2 वर्ष का लाभ मिला है। वही मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना और असंगठित कर्मकार मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना में पंजीकृत निर्माण श्रमिक एवं असंगठित कर्मकार की मृत्यु पर एक लाख रुपये एवं दिव्यांगता पर 50 हजार की राशि दी जा रही है। विभिन्न योजनाओं में 16 लाख से अधिक श्रमिकों को लगभग 284 करोड़ रुपए की सहायता सहायता पहुंचाई गई है ।
]]>रायपुर , 1 जनवरी । nav varsh shubhakaamanaen मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को नववर्ष की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कामना की है कि नया वर्ष सभी लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लाए। श्री बघेल ने कहा है कि हम वर्ष 2021 के अंतिम पायदान पर खड़े हैं। यह समय बीते वर्ष के आकलन और उससे सीख लेकर आगे बढ़ने का है। इस साल कोरोना महामारी की दूसरी लहर की विभीषिका से सभी ने डटकर मुकाबला किया। कोरोना महामारी ने हमसे कई अपनों को छीना वहीं लोगों की समर्पित सेवाभावना से हमने हजारों की जानें बचाई ।
nav varsh shubhakaamanaen यह साल चुनौतियों से भरा रहा जिस पर हम सबने हिम्मत, एक दूसरे के साथ और सहयोग से विजय प्राप्त की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कोरोना वारियर डॉक्टर्स, नर्सेस, पुलिस, मीडिया सहित कोरोना संक्रमण से बचाव में जुटे हजारों लोगों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मानवता की सर्वोच्च सेवा की मिसाल पेश की है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि कोरोना संकट की विपरीत परिस्थितियों में भी राज्य सरकार ने किसानों, मजदूरों, गरीबों, युवाओं, महिलाओं सहित सभी वर्गों के हित के लिए अनेक कार्य करते हुए सफलता पाई है। इस दौरान राज्य सरकार ने न सिर्फ विकास को गतिमान रखा बल्कि उद्योग, कृषि, रोजगार के क्षेत्र की रफ्तार भी कायम रखी।
बच्चों और महिलाओं तक पौष्टिक भोजन की उपलब्धता, मजदूरों और राहगीरों को आश्रय और भोजन के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच के लिए प्रदेश में दिन-रात काम किया गया। ( nav varsh shubhakaamanaen ) ऐसे समय जब लोगों को रोजगार के साधन नहीं मिल रहे थे, छत्तीसगढ़ ने बेरोजगारी दर को नियंत्रित रखा और लोगों को भरपूर काम दिया। इसका सुखद परिणाम है कि सामाजिक कल्याण और विकास में छत्तीसगढ़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान बनाई।
बघेल ने कहा है कि कोरोना काल में ग्रामीणों और किसानों के पास पर्याप्त पैसे रहें इसके लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, वनोपज की खरीदी जैसे कार्यों को जारी रखा गया, जिससे छत्तीसगढ़ में मंदी का असर दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हम अपनी गौरवशाली परम्परा और पहचान को कायम रखते हुए गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन भरोसा है कि सबके सहयोग से हम फिर जीतेंगे। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से सहयोग का आह्वान करते हुए कहा है कि नई उम्मीद और पूर्ण विश्वास के साथ सभी एकजुटता के साथ नए साल की सुनहरी सुबह के अभिनंदन के लिए तैयार हों।
]]>नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से (Bhavan Nirman) श्रम विभाग ने प्रदेश के समस्त नगर पालिक निगमों के आयुक्त, नगर पालिका परिषदों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों, नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, जिला पंचायतों और जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों सहित राज्य शासन के समस्त विभागीय सचिवों को पत्र जारी कर निर्देश दिए है
कि भवन एवं सन्निर्माण उपकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नियमानुसार प्रचलित दर पर उपकर कटौती की जाए।
अधिकारियों को छत्तीसगढ़ (Bhavan Nirman) भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल द्वारा समय-समय पर लिए गए निर्णयों के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों के निर्माण कार्यो के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के मानक दर और शहरी क्षेत्रों के निर्माण कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग के प्रचलित मानक दर के आधार पर निर्माण प्राक्कलन की गणना करने के निर्देश दिए गए हैं।
]]>FTO का फुल फॉर्म Fund Transfer Order है।जिसका मतलब यह होता हैं कि “राज्य सरकार” द्वारा लाभार्थी के आधार नंबर, बैंक खाता संख्या और बैंक के IFSC कोड सहित अन्य विवरणों की जांच कर ली गई है और सही पाए गए हैं आपकी किस्त राशि तैयार हैं और सरकार द्वारा इसे आपके बैंक खाते में भेजने के आदेश दे दिए गए हैं। लेकिन अभी तक कोई एफटीओ जारी नहीं किया गया है।
जानकारी के मुताबिक पिछले साल 25 दिसंबर को (PM Kishan Samman Nidhi yojna) पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों के खातों में पैसे भेजे थे। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (PM Kishan Samman Nidhi yojna) पीएम किसान सम्माम निधि योजना के तहत 18 हजार करोड़ रुपए जारी किए। पीएम किसान योजना की किस्त के तौर पर देश के करीब नौ करोड़ से अधिक किसानों के खाते में 18 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए।
इसके बाद 31 मार्च 2021 तक इस किस्त के तहत 10,23,49,443 लाभार्थियों के खातों में पैसा पहुंच चुका है।
पीएम किसान सम्मान निधि के तहत केंद्र सरकार हर साल 6000 रुपये 2000-2000 की तीन किस्तों में किसानों के खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर करती है। अब तक सरकार 9 किस्तें जारी कर चुकी है और इस योजना में 12 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड किसानों को इंतजार है।
इस बार पीएम किसान सम्मान निधि योजना में एक बड़ा बदलाव किया गया है। किसानों को e-KYC करना होगा।
अब तक मिल चुकी हैं नौ किस्तें 10 वी क़िस्त बाकी
पहली किस्त DEC-MAR 2018-19 के लाभार्थी किसानों की संख्या 3,16,10,700
दूसरी किस्त APR-JUL 2019-20 के लाभार्थी किसानों की संख्या 6,63,27,601
तीसरी किस्त AUG-NOV 2019-20 के लाभार्थी किसानों की संख्या 8,76,21,282
चौथी किस्त DEC-MAR 2019-20 के लाभार्थी किसानों की संख्या 8,96,00,395
पांचवी किस्त APR-JUL 2020-21 के लाभार्थी किसानों की संख्या 10,49,31,270
छठवीं किस्त AUG-NOV 2020-21 के लाभार्थी किसानों की संख्या 10,23,14,245
सातवीं किस्त DEC-MAR 2020-21 के लाभार्थी किसानों की संख्या 10,23,49,456
आठवीं किस्त APR-JUL 2021-22 के लाभार्थी किसानों की संख्या 11,11,52,851
नवमी किस्त AUG-NOV 2021-22 के लाभार्थी किसानों की संख्या 11,12,88,002
]]>जांजगीर-चांपा, 15 दिसंबर, | Dhaan Uparjan kendra : अध्यक्ष अपेक्स बैंक बैजनाथ चन्द्राकर ने आज सारागांव धान उपार्जन केन्द्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। चन्द्राकर ने धान बेचने आये किसानों से चर्चा कर धान खरीदी व्यवस्था का जायजा लिया।
उन्होंने ने बताया कि (Dhaan Uparjan kendra) धान खरीदी में बारदाने को लेकर किसी भी प्रकार की कोई समस्या नही है। किसान स्वयं के बारदानों में भी धान बेच सकते है। इसका ऑनलाइन एण्ट्री भी किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि (Dhaan Uparjan kendra) राज्य सरकार द्वारा पुराना बारदानें के लिए 25 रुपये प्रति बारदाना तय किया गया है। राज्य सरकार के आदेश के अनुसार प्रति बारदाना 25 रूपए की दर से किसानों के खाते में भुगतान किया जाएगा।
चन्द्राकर ने धान खरीदी से संबंधित अधिकारियों से कहा कि निर्धारित अनुपात में केन्द्र के तौल क्षमता के अनुसार टोकन जारी करें। खरीदे गये धान का उठाव भी निरंतर जारी रहे यह सुनिश्चित किया जाय।
ताकि आने वाले धान के लिए समुचित स्थान उपलब्ध रहे। निरीक्षण के दौरान अपैक्स बैंक के उप महाप्रबंधक भूपेश चंद्रवंशी, प्रबंधक ए के लहरे, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के नोडल अधिकारी अश्वनी पाण्डेय सहित धान खरीदी से संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
]]>साप्ताहिक बाजार और पौनी पसारी परम्परा (CgPauni Pasari parampara) छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। वर्तमान परिस्थिति में गांव में पौनी-पसारी की परम्परा भले ही कमजोर हुई हो, लेकिन आज भी यह मौजूद है। गांव में जब तक यह परम्परा सुदृढ रही, लोगों को अपने काम काज के लिए भटकना नहीं पड़ा। बदलती हुई परिस्थतियों में भी गांव के कमजोर तबकों को रोजगार दिलाने में पौनी पसारी व्यवस्था महत्वपूर्ण रही है इसलिए राज्य सरकार इस परम्परा को पुनर्जीवित कर रही है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा हाल में ही गांवों में रहने वाले भूमिहीन मजदूरों और शिल्पियों के जीवन में उजियारा लाने के लिए दो महत्वपूर्ण फैसले किए गए हैं। ग्रामीण भूमिहीन मजदूरों और पौनी पसारी व्यवस्था से जुड़े लोगों को साल में 6 हजार रूपए की आर्थिक सहायता देने के लिए राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना और पौनी पसारी व्यवस्था से जुड़े व्यवसायों को मजबूत करने के लिए तेलघानी, चर्मशिल्प, लौहकर्म और रजककार बोर्ड का गठन करने का निर्णय लिया गया है। इन बोर्डो के गठन की अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। इन दोनों योजनाओं का व्यापक असर ग्रामीण जनजीवन पर पड़ेगा। गांव में रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर भी बढ़ेगे। इससे परम्परागत व्यवसाय से जुड़े लोगों को बड़ा सहारा मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2018 में नई सरकार के गठन के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की पहल से ग्रामीण जन जीवन में नई चेतना आयी है। सुराजी गांव योजना से एक तरफ जहां खेती किसानी की ओर फिर से किसान अग्रसर हुए, वहीं न्याय योजनाओं से उनकी आर्थिक स्थिति और रहन सहन में काफी परिवर्तन आ रहा है। गांवों के गौठानों में गोधन न्याय योजना में खरीदे गए गोबर से महिला समूहों को वर्मीकम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट तैयार करने में रोजगार दिया जा रहा है।
पौनी पसारी योजना में इन कार्यों से जुुड़े लोगों के लिए नगर-निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में नए बाजार बनाए जा रहे हैं, जिससे इन लोगों को अपने काम-काज के लिए सुविधाजनक स्थान मिल सके। उन्हें अपने कारोबार के जरिए नियमित रूप से आमदनी मिल सके। इस योजना में असंगठित क्षेत्र के परंपरागत व्यवसायी एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को सघन शहरी क्षेत्रों में व्यवसाय के लिए दस रूपए दैनिक शुल्क पर चबूतरा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इस योजना में लगभग 12000 स्थानीय बेरोजगारों व उनके परिवारजनों को उनके निवास के समीप ही स्थाई रोजगार मिल रहा है। योजना के तहत 261 पौनी पसारी बाजार स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 58 पूर्ण कर लिए गए हैं तथा 107 निर्माणाधीन हैं।
राज्य सरकार द्वारा हाल में ही शुरू की गई राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना में भी भूमिहीन मजदूरों के साथ पौनी पसारी (CgPauni Pasari parampara) व्यवस्था से जुड़े लोगों को भी सालाना 6 हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। राज्य में इस योजना से 10 लाख से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले भूमिहीन कृषि मजदूरों के साथ ही गांव के लोहार, नाई, धोबी, बढ़ई, चर्मशिल्प और पुरोहित का कार्य करने वाले लोगों को भी लाभ मिलेगा। आर्थिक सहायता को लेकर गांव-गांव में मजदूर वर्गों में खुशी का माहौल है। उन्हें अब अपने परिवार के भरण पोषण के लिए यह सहायता राशि काम आएगी। मजदूरों को आर्थिक सहायता देने की पहल देश में सबसे पहले छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा की गई है। इस योजना में मिलने वाली राशि से उन्हें नया संबल मिलेगा। जनता से सरकार का रिश्ता और मजबूत होगा।
औद्योगीकरण, शहरीकरण की मार झेल रहे तेलघानी, चर्मशिल्प, रजककार और लौह शिल्प व्यवसायों को बोर्डों के गठन से फिर से पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। इन व्यवसायों से जुडे बोर्डो के माध्यम से शिल्पकारों को स्वरोजगार के लिए सहायता दी जाएगी। साथ ही उनके लिए बाजार की व्यवस्था, व्यवसायों को बढ़ाने और वेल्यूएडिशन के लिए आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी। शिल्पियों को बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। रोजगार और व्यवसाय बढ़ने से इन शिल्पियों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। उनके काम काज की कार्यकुशलता में सुधार होगा और इन शिल्पियों के रोजगार को अधिक लाभदायक बनाने में मदद मिलेगी।
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