Home छत्तीसगढ़ नक्सलवाद का अंत और बदलता बस्तर

नक्सलवाद का अंत और बदलता बस्तर

7
0
Spread the love

रायपुर. 
बस्तर ने लंबे समय नक्सलवाद का दंश झेला है। यहां डर के कारण आम लोगों का आना जाना तक नहीं होता था। आज उसी बस्तर में बदलाव देखकर बहुत अच्छा लगता है। 31 मार्च 2026 की तारीख इतिहास में दर्ज हो गई। देश के गृह मंत्री अमित शाह ने जो संकल्प छत्तीसगढ़ के बस्तर को लेकर लिया था वो उन्होंने तय समय पर पूरा किया कर दिया। हजारों हथियार धारी नक्सलियों का सरेंडर कोई आसान काम नहीं था। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद ने देश के जवानों से लेकर नेताओं तक की शहादत देखी है। ये वही बदला बस्तर अब नजर आ रहा है जहां दिन में भी लोग पता पूछने पर घर के दरवाजे लगा लिया करते थे। लेकिन अब नक्सलवाद के सफाये के साथ यहां आदिवासी समाज को मुख्य धारा में जोड़ने का प्रयास केंद्र और प्रदेश की सरकार मिलकर कर रही है। ये बात वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे ने कही। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से बस्तर में सड़क से लेकर पानी तक की व्यवस्था पर सरकार का फोकस है वो पहले कर पाना आसान नहीं था। वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे ने बदलते बस्तर को लेकर संक्षिप्त में अपनी बात अनटोल्ड स्टोरीज पत्रिका द्वारा आयोजित परिचर्चा के दौरान कही। श्री पांडे ने कहा कि बस्तर के आम लोग बहुत ही सरल और सहज हैं। यही कारण रहा कि नक्सलवाद के कारण लंबे समय तक अपने हक की बात करने में भी पीछे ही रहे। लेकिन अब समय बदला है हालत बदले हैं और इससे बस्तर बदल रहा है। परिचर्चा में अपनी बात रखते हुए रवि भवन व्यापारी संघ के पूर्व अध्यक्ष जय नेभानी ने कहा कि बस्तर में पहले व्यापार करना उतना आसान नहीं था। लेकिन अब नक्सलवाद के खात्मे के साथ यहां जाना और व्यापार करना आसान हो रहा है। 31 मार्च को जब बस्तर नक्सलमुक्त हुआ तो पूरे छत्तीसगढ़ में एक अलग ही माहौल बना। देश के गृह मंत्री अमित शाह ने जो वादा बस्तर को लेकर किया था वो उन्होंने उसी तारीख को पूरा किया जो जनता को बताया था। श्री नेभानी ने कहा कि अनटोल्ड स्टोरीज पत्रिका के स्थापना दिवस पर आयोजित इस परिचर्चा में नक्सलवाद के खात्मे और बदलते बस्तर को लेकर बात हो रही है। आज बस्तर में देर रात तक लोगों की आवाजाही को देख जा सकता है। बाहर से आने वाले सैलानी यहां की खूब सूरती को निहारने दूर दूर से आ रहे हैं। ये बदलते बस्तर का सबसे बड़ा और बेहतर उदाहरण है। रायपुरमें अनटोल्ड स्टोरीज पत्रिका द्वारा आयोजित परिचर्चा में अपने विचार रखते हुए लेखक विनोद काशिव ने कहा कि बस्तर को बदलने का प्रयास सराहनीय है। नक्सलवाद का अंत होना बस्तर के लिए एक आजादी की तरह है। नक्सलवाद के कारण यहां रहने वाले अंदरूनी इलाके लोग खुद होकर कोई फैसला तक नहीं ले पाते थे। नक्सली उनके परिवार में होने वाले विवाह तक में अपनी मर्जी चलाते थे। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक नक्सलियों के निशाने पर रहते थे। सालों तक यहां के आम आदिवासी समाज ने उसका दुष्प्रभाव झेला है। लेकिन आज जब हम बदलते बस्तर की बार करते हैं तो कहते हैं कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने मिलकर लोगों को इस दंश से बचाया है।श्री काशिव कहते हैं कि बदले बस्तर में अब दूर इलाकों तो सीएम द्वारा संचालित बस सेवा चल रही है तो वहीं लोगों को पक्के मकान भी मिल रहे हैं। सड़क से लेकर बिजली पानी और स्कूल हर सुविधा परसरकार का फोकस है जो बदलते बस्तर को नई पहचानदे रहा है। संपादक विशाल यादव ने कहा कि बस्तर में लंबे समय बेकाबू नक्सलवाद को लेकर जो अंतिम परिणाम आया है वो बेहद ही सुखद और सुनहरे भविष्य को लेकर आया है। अब बदलते बस्तर में पर्यटन से लेकर अन्य सुविधाओं पर विष्णुदेव साय सरकार का फोकस है। यहां केंद्र सरकार ने रेल परियोजना का विस्तार करने का खाका खींच दिया है जो आने वाले समय में आम लोगों को सुविधाएं देगा। परिचर्चा में आए सभी वक्ताओं का विशाल यादव ने धन्यवाद देते हुए आभार प्रकट किया।


Spread the love