अमीर बनने और वेल्थ क्रिएशन के सफर में समय को सबसे बड़ा जादुई टूल माना जाता है. कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत का पूरा फायदा उठाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि निवेशक जितनी जल्दी हो सके अपने निवेश की शुरुआत कर दे. जब आप कम उम्र में निवेश शुरू करते हैं, तो आपकी पूंजी को बढ़ने और बाजार के उतार-चढ़ाव से उबरने के लिए एक लंबा समय मिलता है. इसके विपरीत, देरी से शुरू किए गए निवेश में आपको मनमुताबिक फंड जुटाने के लिए अपनी जेब से बहुत मोटी रकम हर महीने लगानी पड़ती है, जो हर किसी के लिए व्यावहारिक नहीं होता
60 साल की उम्र तक 5 करोड़ रुपये का कॉर्पस तैयार करने के लिए उम्र के हिसाब से गणित पूरी तरह बदल जाता है. अगर कोई निवेशक 30 साल की उम्र में इस लक्ष्य के लिए शुरुआत करता है, तो उसे हर महीने केवल 16400 रुपये की एसआईपी (SIP) करनी होगी. इतनी छोटी रकम से भी वह अगले 30 सालों में अपने वित्तीय लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकता है. इसके ठीक उलट, यदि कोई व्यक्ति इस फैसले को टालता रहता है और 45 साल की उम्र में निवेश की शुरुआत करता है, तो उसी 5 करोड़ रुपये के लक्ष्य को पाने के लिए उसे हर महीने 1.06 लाख रुपये की भारी-भरकम एसआईपी करनी होगी. यानी सिर्फ 15 साल की देरी की वजह से उसे हर महीने 89600 रुपये ज्यादा जेब से निकालने होंगे, जो किसी भी नौकरीपेशा के मंथली बजट को बिगाड़ सकता है.



