पिछले 2-3 सालों में सब्जी, दूध, राशन से लेकर बच्चों की स्कूल फीस तक हर चीज महंगी हुई है. मई 2026 के ताजा सरकारी आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि देश में थोक महंगाई दर (WPI) उछलकर 9.68 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि खुदरा महंगाई (CPI) भी लगातार पांचवें महीने बढ़कर 3.93 फीसदी हो चुकी है. महंगाई के ऐसे चौतरफा बोझ के बीच देश का करोड़ों मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि सरकार इस बार पीएफ (PF) की ब्याज दरों में शायद कुछ बढ़ोतरी करेगी. लेकिन सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी ईपीएफ (EPF) की ब्याज दर को 8.25 प्रतिशत पर ही लॉक रखा है. पिछले 3 वर्षों से यह ब्याज दर इतनी ही है. जब रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हों और जेब पर बोझ बढ़ गया, तो कम से कम प्रोविडेंट फंड की ब्याज दर में थोड़ी बढ़ोतरी करके नौकरीपेशा लोगों को मरहम तो लगाया ही जा सकता था.



