कई लोगों को जब उनकी पसंद का घर मिल जाता है तो वे उत्साह में कुछ जरूरी चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं. अच्छा लोकेशन, बजट में किराया और सुंदर घर देखकर वे तुरंत टोकन राशि जमा कर देते हैं. लेकिन कुछ समय बाद अतिरिक्त मेंटेनेंस चार्ज, पार्किंग फीस या मरम्मत के खर्च जैसी बातें सामने आने लगती हैं. ऐसे में शुरुआत में ही सही जानकारी लेना बेहद जरूरी हो जाता है.
किराए के अलावा और कौन-कौन से खर्च होंगे?
घर का ऑनलाइन या विज्ञापन में दिखाया गया किराया ही आपकी कुल मासिक लागत नहीं होता. कई सोसायटियों में मेंटेनेंस शुल्क, पार्किंग फीस, पानी का बिल और अन्य चार्ज अलग से देने पड़ते हैं. इसलिए मकान मालिक से पहले ही पूछ लें कि हर महीने कुल कितना खर्च आएगा. इससे आपका बजट बिगड़ने से बच सकता है
सिक्योरिटी डिपॉजिट और एग्रीमेंट की शर्तें समझें
किराएदारों के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है. यह जानना जरूरी है कि जमा राशि में से कितनी रकम वापस मिलेगी, किन परिस्थितियों में कटौती हो सकती है और घर खाली करने के बाद पैसे लौटाने में कितना समय लगेगा. साथ ही एग्रीमेंट की अवधि, नोटिस पीरियड, किराया बढ़ाने के नियम और लॉक-इन अवधि जैसी शर्तों को भी ध्यान से पढ़ना चाहिए



