जब कोई व्यक्ति होम लोन के लिए आवेदन करता है, तो बैंक उसकी आय के आधार पर एक बड़ी लोन राशि मंजूर कर सकता है. यह देखकर अक्सर खरीदार उत्साहित हो जाते हैं और बड़ा घर, बेहतर लोकेशन या अतिरिक्त सुविधाओं वाले फ्लैट के बारे में सोचने लगते हैं. लेकिन बैंक का उद्देश्य केवल यह आंकना होता है कि ग्राहक किस हद तक किस्त चुका सकता है. दूसरी ओर, व्यक्ति को अपने पूरे जीवन की जरूरतों को भी ध्यान में रखना पड़ता है. घर की EMI के अलावा बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य खर्च, बीमा, निवेश, वाहन रखरखाव और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी होती हैं, जिनके लिए नियमित धन की आवश्यकता पड़ती है.
कई लोग यह सोचकर बड़ा होम लोन ले लेते हैं कि आने वाले वर्षों में उनकी आय बढ़ जाएगी और EMI संभालना आसान हो जाएगा. हालांकि यह अनुमान हमेशा सही साबित नहीं होता. नौकरी में बदलाव, आर्थिक मंदी या अन्य परिस्थितियां आय की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं. यदि हर महीने वेतन का बहुत बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है, तो अचानक आने वाला कोई भी खर्च वित्तीय दबाव बढ़ा सकता है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी अपने बजट में कटौती करनी पड़ सकती है. यही कारण है कि घर सुरक्षा का माध्यम बनने के बजाय तनाव का कारण भी बन सकता है.



