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कॉन्‍ट्रैक्‍ट वालों को भी 7 तारीख तक मिल जाएगी सैलरी, केंद्र सरकार का बड़ा आदेश, नियम तोड़ा तो ब्‍लैक लिस्‍ट होंगे ठेकेदार

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केंद्र सरकार ने मंत्रालयों, विभागों, सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों में काम करने वाले कॉन्‍ट्रैक्‍ट और आउटसोर्स कर्मचारियों की सैलरी समय पर देने को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं. वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने कहा है कि अब मजदूरी और वेतन भुगतान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि सभी ठेका कंपनियों और ठेकेदारों को कर्मचारियों का वेतन तय समय सीमा के भीतर देना होगा. अब हर महीने का वेतन अगले महीने की 7 तारीख तक देना अनिवार्य होगा. भुगतान बैंक ट्रांसफर या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से करना होगा.

केंद्र की ओर से जारी नए निर्देशों के मुताबिक, अगर ठेकेदार समय पर भुगतान नहीं करता है तो संबंधित सरकारी विभाग सीधे कर्मचारियों को भुगतान करेगा. इसके बाद संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है. बार-बार नियम तोड़ने पर पूरे केंद्र सरकार के विभागों में ठेकेदार पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा. इसके बाद ठेकेदार किसी भी कर्मचारी को कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर नहीं रख सकेगा.
डीडीओ करेंगे हर महीने जांच
सरकार ने सभी ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) को निर्देश दिया है कि वे हर महीने यह जांच करें कि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिला या नहीं. GeM और PFMS पोर्टल से रिपोर्ट निकालकर निगरानी करने को भी कहा गया है. सरकार ने यह भी कहा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सैलरी के लिए पहले से बजट और फंड सुनिश्चित किए जाएं. GeM या अन्य माध्यम से किए गए कॉन्ट्रैक्ट में पूरे अवधि के भुगतान के लिए राशि ब्लॉक करनी होगी.
लेबर कोड लागू होने के बाद सख्ती
सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए चार नए लेबर कोड 21 नवंबर 2025 से लागू किए हैं. इनमें वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर कर्मचारियों को ज्यादा सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है. इसी प्रावधान के तहत न सिर्फ समय पर वेतन मिलना सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि कर्मचारियों के ओवरटाइम वर्क के भुगतान और उससे संबंधित समय के नियमों को भी स्‍पष्‍ट किया गया है.

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